यूआईडीएआई

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पृष्ठभूमि
भारत के प्रत्येक निवासियों को प्रारंभिक चरण में पहचान प्रदान करने एवं प्राथमिक तौर पर प्रभावशाली जनहित सेवाऐं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ में विशिष्ट पहचान परियोजना पर योजना आयोग द्वारा विचार किया गया था। यह सरकार के विभिन्न स्कीमों, कार्यक्रमों की प्रभावशाली निगरानी में एक औज़ार की तरह भी काम करेगा।

(क) विशिष्ट पहचान के विचार पर पहली बार 2006 में चर्चा कर तब कार्य प्रारंभ किया गया, जब सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ''गरीबी रेखा के नीचे बसे परिवारों के लिये विशिष्ट पहचान'' परियोजना 3 मार्च, 2006 को प्रशासनिक अनुमोदन दिया गया। यह परियोजना राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) द्वारा 12 माह की अवधि में लागू किया जाना था । बाद में जुलाई, 2006 को गरीबी रेखा के नीचे बसे परिवारों के लिये विशिष्ट पहचान परियोजना के अंतर्गत मुख्य डाटाबेस के डाटा फील्ड्स में उन्हें अद्यतन, संशोधन, जोड़ने, हटाने आदि की प्रक्रिया पर सलाह देने हेतु प्रक्रिया समिति बनाई गई। यह डा. अरविन्द विरमानी, प्रमुख सलाहकार, योजना आयोग की अध्यक्षता में बनाई गयी।

(ख) यू.आई.डी.ए.आई. परियोजना पर एक रणनीतिक दृष्टिकोण, मेसर्स विप्रो लिमिटेड (यू.आई.डी.ए.आई. के पायलट परियोजना में डिजाइन चरण एवं प्रबंधन चरण के परामर्शदाता) द्वारा तैयार कर इस समिति को प्रस्तुत किया गया। यह परिकल्पना की गई है कि (यू.आई.डी.ए.आई. का चुनावी डाटाबेस के साथ निकट का संबंध होगा। समिति ने योजना आयोग के तत्वावधान में एक अंतर्विभागीय एवं तटस्थ पहचान सुनिश्चित करने के लिये एक कार्यकारी आदेश के द्वारा एक प्राधिकरण बनाये जाने की आवश्यकता की अनुशंसा की थी और इसी के साथ यह 11वीं योजना के लिये निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहेगा। 30 अगस्त 2009 को आयोजित प्रक्रिया समिति की 7वीं बैठक में योजना आयोग को ''सिद्धांत रूप में'' संसाधन मॉडल पर आधारित एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया है।

(ग) इसी समय में, भारत के महापंजीयक, भारत के नागरिकों के लिये राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एवं बहुउद्देशीय राष्ट्रीय पहचान कार्ड बनाने में कार्यरत थे।

(घ) अतएव, प्रधानमंत्री के अनुमोदन के साथ यह निर्णय लिया गया कि अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) का गठन किया जाये जो दो योजनाओं- नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विशिष्ट पहचान संख्या परियोजना की तुलना कर सके। परियोजना की कार्यप्रणाली, इसके शीघ्र और प्रभावी समापन हेतु विशेष मील-पत्थर (प्रगति चरणों) पर नजर रखने और इन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) को अधिकार दिए गए । मंत्रियों के समूह का गठन 4 दिसंबर 2006 को किया गया।

• मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूहों की पहली बैठक 27 नवंबर 2007 को आयोजित की गयी। इसमें पहचान संबंधी निवासी डाटाबेस बनाने की आवश्यकता को मान्यता दी गई, भले ही डाटाबेस व्यक्ति विशेष के डाटा केा नए सिरे से एकत्र किया था । पहले से मौजूद डाटाबेस जैसे मतदाता सूची से संग्रह किया गया हो। डाटाबेस निर्माण के बाद इसके रख-रखाव एवं निरंतर आधार पर अद्यतन करने का दायित्व लेने के लिये संस्थागत तंत्र की पहचान करने एवं स्थापित करने की महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य आवश्यकता रही जो इसको स्वंय का डाटाबेस कहेगा ।

• मंत्रियों के समूह की दूसरी बैठक 28 जनवरी 2008 को आयोजित की गई। इसमें एन.पी.आर. एवं यू.आई.डी.ए.आई. के मिलान की रणनीति पर चर्चा की गई। अन्य बातों के साथ योजना आयोग के अधीन यू.आई.डी.ए.आई. को स्थापित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।

• मंत्रियों के समूह की तीसरी बैठक 7 अगस्त 2008 को आयोजित की गई थी। योजना आयोग ने मंत्रियों के समूह के समक्ष यू.आई.डी.ए.आई. स्थापित करने का एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बैठक में निर्णय लिया गया कि कुछ सदस्यों द्वारा यू.आई.डी.ए.आई. के संबंध में (मंत्रियों की बैठक की कार्यवाही का संलग्नक) उठाये गये मुद्दों को अधिकारिक स्तरीय समिति द्वारा जांचने की आवश्यकता को देखते हुए इस मामले को सचिवों की एक समिति को जांचने एवं अपनी सिफारिशों से अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह को अवगत कराने हेतु सौंपना चाहिए ताकि अंतिम निर्णय लेने में सुविधा हो।

• सचिवों की समिति की सिफारिशों के बाद मंत्रियों के समूह की चौथी बैठक 4 नवंबर 2008 को हुई। मंत्रियों के समूह ने सचिवों की सिफारिशों को प्रस्तुत किया गया था एवं निम्नलिखित निर्णय लिये गये।

(क) शुरू में यू.आई.डी.ए.आई. को एक कार्यकारी प्राधिकरण के रूप अधिसूचित कर सकते हैं तथा बाद में इसे उपयुक्त समय पर वैधानिक अधिकार प्रदान कर सकते हैं।

(ख) यू.आई.डी.ए.आई. मतदाता सूची/ईपीआईसी आंकड़ों से प्रारंभिक डाटाबेस बनाने तक की गतिविधि कर सकता है। लेकिन यू.आई.डी.ए.आई. डाटा तत्वों का मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिये डाटाबेस निर्माण करने वाले एजेंसियों को अतिरिक्त अनुदेश दे सकता है।

(ग) यू.आई.डी.ए.आई. , डाटाबेस के निर्माण में अपना निर्णय स्वयं लेगा।

(घ) यू.आई.डी.ए.आई. को 5 वर्षों के लिये योजना आयोग के भरोसे रहना होगा बाद में एक राय ली जायेगी कि यू.आई.डी.ए.आई. को सरकार के भीतर किस रूप में और कहां स्थान दिया जाये।

(ङ) केंद्रीय स्तर पर यू.आई.डी.ए.आई. का गठन 10 कर्मियों की कोर टीम के साथ किया जायेगा एवं योजना आयोग को निर्देशित किया जायेगा कि वह यू.आई.डी.ए.आई. के लिये अलग से पूरे ढांचा, बाकी स्टॅाफ, संगठनात्मक ढांचा आदि सामान्य प्रक्रिया के अधीन अनुमोदन प्राप्त करने से पहले केबिनेट सचिव के पास उसके विचारार्थ इलेक्ट्रानिक विभाग/सीसीईए के माध्यम से विस्तृत प्रस्ताव करे।

(च) केंद्रीय स्तर पर यू.आई.डी.ए.आई. के साथ-साथ राज्य स्तर पर यू.आई.डी.ए.आई. के 3 कर्मियों की कोर टीम को मंजूरी।

(छ) यू.आई.डी.ए.आई. को इस कार्य को आरम्भ कर प्रथम सेट जारी करने के लिये दिसंबर 2009 का लक्ष्य दिया गया था।

(ज) मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार डीओई एवं सीसीईए के माध्यम से पूर्ण संगठनात्मक ढांचा एवं स्टॅाफ के घटकों के लिये अनुमोदन प्राप्त करने से पहले केबिनेट सचिव को एक बैठक बुलाकर संगठनात्मक ढांचा, स्टॅाफ एवं अन्य आवश्यकताओं को अंतिम रूप देना होगा।

1.1 बाद में, 22 जनवरी 2009 को केबिनेट सचिव ने अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह के निर्णय के अनुसरण में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शासनिक ढांचे के बारे में प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार करते हुए निम्न अनुशंसाऐं की हैं-

(क) यू.आई.डी.ए.आई. के गठन हेतु अधिसूचना तत्काल जारी की जानी चाहिये।

(ख) यू.आई.डी.ए.आई. के कार्य पर नजर रखने के लिये एक उच्च स्तरीय सलाहकारों, निगरानी एवं समीक्षा समिति का गठन योजना आयोग के उपाध्यक्ष की अगुवाई में किया जाना चाहिए।

(ग) सदस्य/सचिव, योजना आयोग को आयुक्त, यू.आई.डी.ए.आई. को दिये गये कार्य की देखभाल का कार्य सौंपा जाना चाहिये।

(घ) कोर टीम को यथास्थान रखा जाना चाहिए।

1.2 अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह की 4 नवंबर 2008 को हुई चौथी बैठक का अनुसरण करते हुए, यू.आई.डी.ए.आई. का गठन किया गया एवं 28 जनवरी 2009 को योजना आयोग के संरक्षण में 115 अधिकारियों की कोर टीम के साथ संबद्ध कार्यालय के रूप में अधिसूचित किया गया। यू.आई.डी.ए.आई. की जिम्मेदारियों एवं भूमिका इस अधिसूचना में निर्धारित की गई थी। यू.आई.डी.ए.आई. को अपनी योजनाओं और नीतियों को लागू करने के लिए डाटाबेस अपने पास रखने एवं उसे ऑपरेटर करने की जिम्मेदारी दी गई थी और निरंतरता के आधार पर डाटाबेस को अद्यतन करने एवं उसके रख-रखाव की जिम्मेदारी भी दी गई है।
प्रधानमंत्री की परिषद
यू.आई.डी.ए.आई. पर प्रधानमंत्री की परिषदः- 02 जुलाई 2009 को प्रधानमंत्री की मंत्री परिषद की अनुशंसा के बाद, भारत सरकार द्वारा श्री नंदन एम निलेकणी को केबिनेट मंत्री के दर्जे एवं ओहदे के साथ यू.आई.डी.ए.आई. के अध्यक्ष के रूप में 5 वर्षों के लिये नियुक्त किया गया। श्री निलेकणी ने 23 जुलाई 2009 को इसके अध्यक्ष पद का कार्यभार सम्भाला। यू.आई.डी.ए.आई. पर प्रधानमंत्री की परिषद को 30 जुलाई 2009 को स्थापित किया गया था। परिषद यू.आई.डी.ए.आई. को उसके कार्यक्रम, कार्य प्रणाली और क्रियान्वयन पर सलाह देनी है ताकि मंत्रालय /विभागों /पणधारियों /साझेदारों के बीच समन्वयन सुनिश्चित हो सके। परिषद की हर 3 माह में एक बैठक होगी। यू.आई.डी.ए.आई. पर प्रधानमंत्री परिषद की पहली बैठक 12 अगस्त 2009 को आयोजित की गई थी।

प्रधानमंत्री परिषद के प्रमुख निर्णय निम्नलिखित थे:
वैधानिक ढांचे की आवश्यकता।
कार्यनीति का व्यापक समर्थन ।
भागीदारों को बजट सहायता।
बायोमेट्रिक एवं जनसांख्यिकीय मानक स्थापित करना।
यू.आई.डी.ए.आई. के ढांचे की रूप-रेखा अनुमोदित करना।
कार्मिक एवं अन्य मामलों में उदारता।
अधिकारियों का चयन, तैनाती और उनकी वापसी।
सरकारी आवास की पात्रता।
पदों की व्यापक बैंडिंग
मार्किट से विशेषज्ञों को लेना
पी आई ओ की वैश्विक सलाहकार परिषद का गठन
इन्टर्स एवं सब्बाटिकल ग्लोबल प्रोक्योर्मेन्ट
मंत्रीमंडल समिति
भारत सरकार ने 22 अक्टूबर 2009 को यू.आई.डी.ए.आई. पर मंत्रीमंडल समिति के गठन के आदेश जारी किये। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित इस समिति में वित्त, कृषि, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, गृह, विदेश, विधि, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, श्रम एवं रोज़गार , मानव संसाधन विकास, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन एवं पर्यटन मंत्रियों को शामिल किया गया है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष एवं यू.आई.डी.ए.आई. के अध्यक्ष इसके विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति के कार्य निम्नानुसार होंगेः-

यू.आई.डी.ए.आई. से संबंधित सभी मुद्दे जिसमें शामिल हैं संगठन, योजनाओं, नीतियों, कार्यक्रम, स्कीमें, वित्त पोषण एवं यू.आई.डी.ए.आई. के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये अपनाई जाने वाली कार्य-प्रणाली।
जनादेश और उद्देश्य
यू.आई.डी.ए.आई. से संबंधित सभी मुद्दे जिसमें शामिल हैं संगठन, योजनाओं, नीतियों, कार्यक्रम, स्कीमें, वित्त पोषण एवं यू.आई.डी.ए.आई. के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये अपनाई जाने वाली कार्य-प्रणाली। यू.आई.डी.ए.आई. को योजना आयोग के अधीन एक संबद्ध कार्यालय के रूप में बनाया गया है। इसकी भूमिका, भारतीय निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या जारी करने हेतु आवश्यक संस्थागत, तकनीकी एवं वैधानिक संरचना विकसित करना एवं इसे लागू करना है। 25 जून 2009 को केबिनेट द्वारा यू.आई.डी.ए.आई. का अध्यक्ष पद स्वीकृत एवं अनुमोदित किया गया एवं श्री नंदन एम. निलेकणी को केबिनेट मंत्री का दर्जा एवं पद के साथ इसके प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। श्री रामसेवक शर्मा को महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
अभियान एवं समय-सीमा
अभियान
अभियानः यू.आई.डी.ए.आई. की भूमिका विशिष्ट पहचान संख्या जारी करना है एवं उनका आन-लाइन सत्यापन तथा प्रमाणीकरण और कम लागत के द्वारा डुप्लिकेट एवं जाली पहचान को सशक्त रूप से रोकना है।
समय-सीमा
समय-सीमाः अगस्त 2009 में शुरू कर अगले 12-18 माह में यू.आई.डी.ए.आई. को संख्या जारी करना होगा। पहली संख्या अगस्त 2010 से फरवरी 2011 के मध्य जारी करनी होगी। यू.आई.डी.ए.आई. 5 वर्षों में 60 करोड़ विशिष्ट पहचान संख्या जारी करने की योजना बना रहा है। पहचान संख्याओं को विभिन्न पंजीयक-एजेंसियों के माध्यम से पूरे भारत में जारी किया जायेगा।
संगठन विवरण
28 जनवरी 2009 को एक अधिसूचना के द्वारा योजना आयोग के संबद्ध कार्यालय के रूप में 115 अधिकारियों और स्टॅाफ की कोर टीम के साथ यू.आई.डी.ए.आई. को स्थापित किया गया। अधिसूचना के अधीन 3 पद (महानिदेशक, उपमहानिदेशक, सहायक महानिदेशक) मुख्यालय हेतु एवं विशिष्ट पहचान आयुक्तों के 35 पद प्रत्येक राज्यों हेतु स्वीकृत किये गये हैं। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि बंगलुरु, चंडीगढ़, दिल्ली, हैदराबाद, गौहाटी, लखनऊ, मुम्बई एवं रांची में क्षेत्रीय कार्यालय खोले जायें। एक तकनीकी केन्द्र बंगलूरू में स्थापित किया गया। सितंबर 2009 में 268 अतिरिक्त पदों का सृजन किया गया। वर्तमान में यू.आई.डी.ए.आई. के पास अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कुल 383 स्वीकृत पद हैं।

मुख्यालय संगठनः यू.आई.डी.ए.आई. का मुख्यालय, अध्यक्ष, श्री नंदन निलेकणी एवं महानिदेशक एवं अभियान निदेशक, आर. एस. शर्मा के साथ नई दिल्ली में स्थापित है। संगठनात्मक डिजाइन में महानिदेशक की सहायता के लिये 7 उप-महानिदेशक, संयुक्त सचिव स्तर के हैं जो विभिन्न खण्डों के प्रभारी हैं । एक उप-महानिदेशक वित्त प्रकोष्ठ का मुखिया है। उप-महानिदेशक की सहायता के लिये 21 सहायक महानिदेशक, 15 उपनिदेशक, 15 अनुभाग अधिकारी, 15 सहायक होंगे। मुख्यालय की लेखा एवं आई.टी. शाखा को मिलाकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों का कुल स्वीकृत स्टॅाफ 146 कर्मियों का है। सभी अधिकारी/कर्मचारी केन्द्रीय कर्मचारी स्कीम के तहत अथवा द्विपक्षीय माध्यम के द्वारा प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किये गये हैं। स्वीकृत पदों में से 85 कार्यरत हैं एवं बचे हुए स्टॅाफ हेतु प्रक्रिया जारी है।

क्षेत्रीय कार्यालयों का संगठनात्मक ढांचाः – प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय डीडीजी की देख-रेख में कार्य करेगा। सहयोग में 4 एडीजी 3 उपनिदेशक, 3 अनुभाग अधिकारी, 1 वरिष्ठ लेखा अधिकारी, 1 लेखापाल एवं निजी स्टॅाफ होगा। क्षेत्रीय कार्यालय एवं उनके क्षेत्र में आने वाले राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की सूची निम्न दी गई हैः-

क्षेत्रीय कार्यालयों की सूची
संगठन चार्ट
प्रधान कार्यालय (प्र.का.)
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क्षेत्रीय कार्यालय (क्षे.का.)
* बड़ा देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें
योजना आयोग
इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं, एवं यह राष्ट्रीय विकास परिषद के पूर्ण मार्गदर्शन के अधीन कार्य करता है। आयोग के उपाध्यक्ष एवं पूर्णकालिक सदस्य, विषय प्रभागों को वार्षिक योजना राज्य योजनाऐं, परियोजनायें, पंचवर्षीय योजना के सूत्रीकरण हेतु सलाह एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
यू.आई.डी.ए.आई. मुख्यालय
अध्यक्ष
Nandan Nilekani Chairman UIDAI
वर्तमान में श्री नंदन निलेकणी केबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यू.आई.डी.ए.आई. ) के अध्यक्ष हैं, जिनका उद्देश्य भारत के सभी निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या उपलब्ध कराना है। श्री नंदन हाल ही तक 1981 में स्थापित इनफोसिस टेक्नोलाजी के सह संस्थापक एवं निदेशक मण्डल के सह-अध्यक्ष थे। स्थापना के बाद से 2009 तक कंपनी के निदेशक के रूप में सेवाऐं देते रहे थे। उन्होंने इंफोसिस में विभिन्न पदों पर कार्य किया है, और वे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष एवं मुख्य ऑपरेटरिंग अधिकारी रहें।

श्री निलेकणी भारत की साफ्टवेयर एवं सेवा कंपनियों के राष्ट्रीय संघ (नेस्काम) एवं बंगलूरू चैपटर के लिये दी इंडस इंटरप्रिन्यूर (टाई) के सह संस्थापक भी हैं। श्री निलेकणी अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र संबंधों पर अनुसंधान के लिये भारतीय परिषद (आईसीआरआईईआर) के गवर्नर मण्डल के सदस्य एवं एनसीएईआर (भारतीय स्वतंत्र व्यवहारिक अर्थशास्त्र अनुसंधान संस्थान) के अध्यक्ष भी हैं।

बैंगलूरू में जन्में श्री निलेकणी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई से विद्युत यांत्रिकी में स्नातक की डिग्री ली है। इन्हें (2004) में सीएनबीसी द्वारा आयोजित एशिया बिजनेस लीडर अवार्ड में वर्ष कार्पोरेट सिटीजन हेतु नामित किया गया था। वर्ष 2005 में इन्हें, अर्थशास्त्र विज्ञान एवं राजनीति शास्त्र पर नवीन सेवाओं के लिये प्रतिष्ठित जोसेफ शुमपीटर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वर्ष 2006 में इन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ''पद्म भूषण'' प्रदान किया गया। इसी वर्ष फोब्र्स एशिया द्वारा ''बिसनेसमेन आफ द इअर'' से भी सम्मानित किया गया। टाइम पत्रिका द्वारा वर्ष 2006 एवं 2009 में इन्हें विश्व के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में सूचीबद्ध किया गया था।
महानिदेशक एवं अभियान संचालक
परियोजना के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी महानिदेशक एवं अभियान संचालक नियुक्त किया गया है। श्री आर.एस. शर्मा को यू.आई.डी.ए.आई. का प्रथम महानिदेशक नियुक्त किया गया है। श्री शर्मा, अपर सचिव पद के अधिकारी हैं एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1978 बैच के अधिकारी हैं। श्री शर्मा झारखंड केडर के हैं जहां इन्होंने सूचना विभाग में प्रमुख सचिव रहते हुए कई ई-गवर्नेंस परियोजनाऐं लागू की हैं।
श्री आर.एस. शर्मा वर्तमान में यू.आई.डी.ए.आई. में महानिदेशक एवं अभियान संचालक के रूप में कार्यरत हैं एवं भारत सरकार के द्वारा भारत के निवासियों हेतु विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने की एक बहुत महत्वाकांक्षी एवं चुनौतीपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर है। इस से पहले श्री शर्मा झारखंड सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पेयजल एवं सफाई विभाग के प्रमुख सचिव थे। इनके पूर्व दायित्वों में सूचना प्रौद्योगिकी, ग्रामीण विकास, मानव संसाधन विकास विभाग भी शामिल हैं। श्री शर्मा ने प्रमुख सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में रहते हुए आईटी एवं ई-गवर्नेंस के क्षेत्रों में राज्य की नीतियों का दायित्व भी निभाया और इन्होंने राज्य के सभी विभागों की विभिन्न ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के क्रियान्वयन का प्रबंधन भी देखा।

श्री शर्मा ने पूर्व में भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। इन्होंने, वित्त, विज्ञान, परिवहन, कोषालय, भविष्य निधि एवं जल संसाधनों के क्षेत्र में काफी कार्य किया है एवं प्रशासनिक सुधार एवं आईटी से लाभ प्राप्त करने के लिये प्रशासनिक प्रक्रिया सरल करने में गहनता से जुड़े रहे। भारत सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग में कार्य करते हुए कई द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय विकास एजेंसियों जैसे विश्व बैंक, एडीबी एमआईजीए एवं जीईएफ के साथ कार्यरत रहे। श्री शर्मा, राजमार्ग, बंदरगाह, हवाई अड्डे एवं दूरसंचार की बुनियादी परियोजनाओं के वित्त-पोषण के प्रभारी भी थे। श्री शर्मा का आईटी एवं ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में दिया गया योगदान व्यापक रूप से सराहा गया है। इसके अतिरिक्त श्री शर्मा आईसीटी से संबंधित बुनियादी सुविधाओं, पुनः अभियांत्रिकरण की प्रक्रिया एवं सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) प्रणाली में सेवा प्रदाता से संबधित कई परियोजनाओं के लिये भी जिम्मेदार थे।

श्री शर्मा भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान, कानपुर से गणित विषय में स्नातकोत्तर हैं एवं कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय (यूएसए)से कम्प्यूटर साइंस में मास्टर हैं।
प्रौद्योगिकी विकास इकाई
यह विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को लेकर बनाई गई है। जिसमें शामिल हैं, प्रौद्योगिकी, वैधानिक ढांचा, हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर की खरीदारी के जानकार आदि। इस इकाई में स्वयंसेवक, संसाधन एवं विश्राम कालीन जन शामिल है।
परियोजना प्रबंधन इकाई

यह इकाई, पहचान संख्या जारी करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने एवं प्रौद्योगिकी, वैधानिक, हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर की खरीदारी परियोजना रिपोर्ट का विस्तृत विवरण, जागरूकता उत्पन्न करना आदि हेतु मार्गदर्शन प्रदान करने की आवश्यकता को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को लेकर स्थापित की गई है। ये पेशेवर अपने-अपने कार्यों में काफी अनुभवी हैं। अतः इन्हें यू.आई.डी.ए.आई. को सलाह देने एवं परामर्शदाताओं/सेवा प्रदाताओं के साथ परियोजना के विभिन्न पहलुओं प्रतिकृति का विकास, अवधारणा के सबूतों का परीक्षण, प्रौद्योगिकी मंच का निर्माण, डिजाइनिंग, संचार एवं जागरूकता कार्यक्रम आदि पर काम करने हेतु संलग्न किया गया है।

यह टीम राष्ट्रीय स्मार्ट सरकार संस्थान, जिसके साथ 30 नवंबर 2009 को यू.आई.डी.ए.आई. का करार हुआ है, की सहायता से स्थापित किया गया है। वर्तमान में 20 पेशेवर, प्रौद्योगिकी, वैधानिक, संचार एवं खरीदारी से लेकर क्षमता निर्माण प्रक्रिया एवं आपरेशन में संलग्न है।
यू.आई.डी.ए.आई. बायोमेट्रिक क्षमता केन्द्र
इस केन्द्र की स्थापना संगठन की भारत के निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या जारी करने की अनिवार्यता को देखते हुए की जा रही है।

केन्द्र प्रारंभिक बायोमेट्रिक प्रणाली चयन क्षमता को निर्देशित करेगा एवं समय-समय पर नवीन प्रौद्योगिकी को चलाने एवं सर्वोत्तम उपयोग करने के लिये वृद्धि भी करेगा। केन्द्र, प्रौद्योगिकी, डिवाइसेस एल्गोरिथम एवं विनिर्देशों को कब और कहां संशोधित करना है, का आंकलन, मूल्यांकन एवं चिन्हित करेगा। यह केन्द्र यू.आई.डी.ए.आई. के उद्देश्य को बायोमेट्रिक प्राप्त करने में अपनी कुशलता का परिचय भी देगा। यह अनुकूल बायोमेट्रिक्स प्रणाली लागू करने में अन्य विभागों के लिये एक राष्ट्रीय संसाधन होगा तथा यह विश्व स्तरीय बायोमेट्रिक प्रतिभाओं को कार्य करने हेतु आकर्षित करेगा। इस तरह यह केन्द्र असाधारण वैज्ञानिकों एवं अभियंताओं का एक मुख्य वर्ग तैयार करेगा।


 

भाविपप्रा पारिस्थितिकी तंत्र

आधार अनुप्रयोग